
Nagaland नागालैंड: नागालैंड सरकार ने शुक्रवार को राज्य में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी विभागों से सख्त पालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मद्देनज़र उठाया गया है।
कोहिमा में इस विषय पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव सेंटियांगर इम्चेन ने की। बैठक में उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने 27 जनवरी 2026 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम (SWM Rules, 2026) को अधिसूचित किया था, जिसके तहत 1 अप्रैल 2026 से 2016 के पुराने नियमों को पूरी तरह से प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि सतत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन आज की आवश्यकता है और इसके प्रावधानों का पालन केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक कानूनी बाध्यता है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी संबंधित विभागों को इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिला प्रशासन, शहरी स्थानीय निकाय, ग्रामीण स्थानीय निकाय और स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय स्थापित कर एक व्यापक रूपरेखा तैयार की जाएगी। साथ ही समयबद्ध कार्य योजनाओं के माध्यम से नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जाएगा।
मुख्य सचिव ने चेतावनी दी कि यदि राज्य में इन नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो इसके गंभीर कानूनी परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश प्रशासनिक जवाबदेही को अनिवार्य बनाता है, जिसके तहत किसी भी प्रकार की लापरवाही या चूक के लिए संबंधित अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार होंगे।
उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे बिना किसी देरी के, पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें ताकि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को मजबूत किया जा सके।
इस अवसर पर प्रधान सचिव वाई. किखेतो सेमा ने भी प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नियमों की सफलता के लिए जन जागरूकता, स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, विभिन्न विभागीय प्रयासों का एकीकरण और अंतर-विभागीय समन्वय आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के आदेशों का समय पर पालन और सभी स्तरों पर सक्रिय सहयोग इस योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
सरकार ने उम्मीद जताई है कि नए नियमों के सख्त पालन से राज्य में कचरा प्रबंधन प्रणाली में सुधार होगा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।





